पन्ना झील

सम्पदा जो यहीं है

पन्ना झील — a poem by Pemba Umoja

झील किनारे पेड़ों से घिरे रास्ते से सुन्दर और क्या है
जो धूप की चित्तियों से भरा हो
जिसे पतझड़ की हवा सहलाती हो?
जो भी सम्पदा आप चाहें, उसे इनसे तौल कर देखें.
शायद यही है
वह सारा पन्ना
जिसकी आपको जीवन भर आवश्यकता हो.

A poem by Pemba Umoja