8 अरब दुनियाएँ

किसने कहा कि आसमाँ में केवल 8 ग्रह हैं?

8 अरब दुनियाएँ — a poem by Pemba Umoja

पगडंडियों और राहों पर चलते हुए
बिस्तरों से उठकर, उन्हीं में लौटते हुए

भीतर बसी दुनियाएँ

व्यस्तताएँ और जुनून
आशाएँ और सपने

वे अपनी आँखों से सोचते हैं
बाएँ, दाएँ, बाएँ, दाएँ मुड़ते हुए

गर तुम देर तक देखो, तो तुम्हें दिखेगा

किसने कहा कि आसमाँ में केवल 8 ग्रह हैं?
जब धरती पर 8 अरब दुनियाएँ हों

और हमने तो अभी अपने रोएँदार दोस्तों की बात ही नहीं की
और उन नटखट 100-पाँवों वालों की भी

मत भूलो ऊपर का ब्रह्मांड
चारों ओर का ब्रह्मांड
और भीतर का ब्रह्मांड।

A poem by Pemba Umoja