हिरण
चारागाह, सरिता, और फलोद्यान में सहज अनुग्रह।
चौकड़ी भरते हिरण,
तुम जानते नहीं,
फिर भी तुम दिशा चुनते हो
ऐसी सटीकता से।
तुम सुंदरता से लाँघते हो
तितली-कुमुदिनियों के खेतों से होकर,
उछलती ट्राउट की धाराओं को पार करते हो,
गुज़रते हो बागों से, तीखी गंध से भरे
पके हुए फलों की।
फिर भी, तुम जानते नहीं।
A poem by Pemba Umoja