पवन का नृत्य
मौन और ध्वनि के बीच पवन घंटियाँ

बस एक पल ठहर जाओ
जैसे हिरण ठहरते हैं
खराब उदाहरण
जैसे पवन घंटियाँ करती हैं बीच-बीच में
हवा के झोंकों के
खामोशी बस वहाँ लटकी रहती है
पक्षी और झींगुर उसे भर देते हैं
पत्तियों की सरसराहट जिस पर हवा में कभी ध्यान नहीं जाता
तुम्हारी अपनी साँस का उठना और गिरना
और फिर वे वहाँ हैं
घंटियाँ
लोलक झूलता है
लेकिन नलिकाओं को नहीं छूता
चाहे जितनी भी कोशिश करे
लेकिन अब इसका कोई खास मतलब नहीं रह गया है
एक ऐसी दुनिया में जहाँ खामोशी और ध्वनि साथ नृत्य करते हैं
कभी रुम्बा में
कभी वाल्ट्ज़ में
पवन घंटियों की तरह
एक घुमाव की प्रतीक्षा में
Pemba Umoja की एक कविता