तुलना?

तुलना से परे एक दुनिया का सौंदर्य

तुलना? — a poem by Pemba Umoja

मैं अवश्य ही सबसे सुंदर
ग्रह पर रहता हूँ इस ब्रह्मांड के।

उसने मुझसे प्रकृति के एक चमत्कार की तुलना दूसरे से करने को कहा—
पेटागोनिया के ग्लेशियरों की इग्वाजू से।

क्या मैं हिम्मत करूँगा तुलना करने की
उसकी दाईं आँख की उसकी बाईं से?
उसकी पीठ के घुमाव की उसकी बाईं जाँघ से?
उसके कान की लौ की उसके पैर की छोटी उंगली से?

मैं कौन होता हूँ इतने भव्य निर्णय करने वाला?

जैसे हर अंगुली, हर अंग, देह का हर कण
जुड़ा है मेरी प्रियतमा से—
हर एक झरना, हर एक पहाड़ी धारा,
हर एक ग्लेशियर, हर तैरता हिमशैल
हमारी इस दुनिया का शरीर बनाते हैं।

उसे, मेरा एकमात्र उत्तर हो सकता है…
कि मैं अवश्य ही सबसे सुंदर
ग्रह पर रहता हूँ इस ब्रह्मांड के।

A poem by Pemba Umoja