साँझ ढले कोलोनिया

तुम सुनाई देती आवाज़ों को गिन सकते हो।

साँझ ढले कोलोनिया — a poem by Pemba Umoja

तुम सुनाई देती आवाज़ों को गिन सकते हो:

एक रुकती हुई साइकिल—

शोर जो सन्नाटे में घुल रहा है;

कदमों की आहट—

पत्थर की सड़क पर चप्पलें;

पेड़ों में ऊँचे गाते झींगुर;

बिल्ली पर भौंकता एक कुत्ता।

दीवार के पास जेरेनियम उगे हैं

जिस पर मैं यह लिख रहा हूँ—

एक पुरानी पत्थर की दीवार

कोलोनिया शहर में

रियो दे ला प्लाटा के किनारे।

Pemba Umoja की एक कविता