तारों की राह
क्षति, क्षणभंगुरता, और उसके पार जो है, उस पर एक ध्यान।
डेविड का क्या होगा,
बिना माँ का वह छोटा लड़का?
या मैरी का,
बिना पति की वह बूढ़ी औरत?
या एगोर का,
जिसने अपनी बहन को खो दिया?
मॉस्को की राह पर,
हमने कितनों को खो दिया।
यह सूची रेखाएँ बनाती है
चाँद तक और वापस।
जल्द ही हम भी खो जाएँगे,
डेविड की माँ की तरह,
उस बूढ़ी औरत के पति की तरह,
एगोर की बहन की तरह।
हम खो जाएँगे और पाए जाएँगे
तारों की उस राह पर।
शायद यह राह
ही विश्राम-स्थल है,
एक संक्षिप्त पड़ाव
मानव रूप में,
फिर हम चल पड़ते हैं,
मधु खोजती मधुमक्खियों की तरह।
हर जीवन हमें देता है
कुछ मीठा
और एक डंक भी।
फिर हम चल पड़ते हैं,
तारों के बीच उड़ते हुए।
या शायद
हम बस समाप्त हो जाते हैं।
बस इतना ही।
A poem by Pemba Umoja