बिल

एक जीवन से क्या बचता है।

बिल — a poem by Pemba Umoja

बिल का क्या बचा?
उसका घर।
उसकी दो बेटियाँ।
चाँदी के मेपल पर उसने जो झूला लटकाया था।
वह लंबी ढलान जहाँ वह सर्दियों में स्लेज चलाता था अभी भी है।
बिल ने वह नहीं छोड़ा, पर उसकी यादें अभी भी वहाँ राहगीरों के मन में टिकी हैं।
और आह, ये शब्द — ये शब्द।
बिल अब तुम्हारे भीतर रहता है।

A poem by Pemba Umoja