कोमाज़ावा पार्क में शरद ऋतु

गिरी हुई पत्तियों के बीच एक पुरानी मेज़।

कोमाज़ावा पार्क में शरद ऋतु — a poem by Pemba Umoja

लकड़ी की एक चौकोर मेज़
लंबे रेशे
बारिश और हवा से पुरानी
गिरी हुई पत्तियों से घिरी
और भूरी मिट्टी।

A poem by Pemba Umoja