एक क्षण
लिफ़्ट के दरवाज़े के पार एक नज़र।

उसने उसे एकटक देखा।
उसने भी वापस देखा।
वह लिफ़्ट के अंदर था।
वह उसके बाहर थी।
वह बस एक क्षण था।
कैसे बस एक क्षण तुम्हें नया आकार दे सकता है?
बदल दे जो कुछ भी,
कभी मायने रखता था?
तुम्हारी साँस रोक दे?
तुम्हें फिर से जगा दे, हर जीवंत चीज़ के प्रति?
संभावना उजागर करे?
वह लालसा, जिसका तुम्हें अहसास तक न था?
कैसे एक झलक,
एक, एक-दो,
तुम्हें क़ैद कर ले बहुत पहले के एक पल में?
एक ऐसी लिफ़्ट जिससे तुम
कभी बाहर नहीं निकल पाओगे?
Pemba Umoja की एक कविता