कोलिक केन में एक राह

वन में एक तिराहा, धुंध और धूप के बीच।

कोलिक केन में एक राह — a poem by Pemba Umoja

मैं अकेला हूँ

वन से घिरा हुआ।

राह फैली हुई है।

बाईं ओर,

बेंत,

ऐलिक्रेस के पेड़ों में जाता भूरा रास्ता।

और दाईं ओर,

मेरी प्रियसी।

वह वापस मुड़ गई है

बंदरगाह की ओर।

वह मुझे बुला रही है।

मुझे चुनना है—

या तो बाईं ओर वन में जाऊँ,

झील के पास उस धुंध में

या फिर

दाईं ओर मुड़ जाऊँ

धूप की उन झिलमिलाती बूँदों में

जो उस टीले पर नाच रही हैं

जहाँ मेरी प्रियसी प्रतीक्षा में है।

ऊँचे पेड़ टिकाए हुए हैं

अपनी शाखाएँ

मेरे थके हुए कंधों पर।

मुझे कुछ देर यहीं ठहरना है।

Pemba Umoja की एक कविता