एक पल और

डूबते सूरज से प्रार्थना।

एक पल और — a poem by Pemba Umoja

बस वहीं बैठे रहो।
हिलो मत।
अपना सुनहरा गोला टिकाओ
धरती के कंधों पर
बस एक पल और।
मेरी इंद्रियों को तुम्हारी यह याद सोख लेने दो।
डूबते सूरज,
दूर क्षितिज के पीछे चुपके से जाते,
बस एक पल और।
बस एक क्षण और।

A poem by Pemba Umoja